कलेक्टर ने दिया अभयदान, अब एसपी से एफआईआर की मांग

कोरबा। न्यू कोरबा हॉस्पिटल से रायपुर रेफर किए गए मरीज की बीच रास्ते में एंबुलेंस के आक्सीजन खत्म हो जाने से मौत हो गई थी। मामले में मृतक के पुत्र द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद जांच की गई। जांच में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही उजागर होने के बाद भी महज न्यू कोरबा हास्पिटल प्रबंधन को कड़ी चेतावनी देकर अभयदान दे दिया गया था। अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई नहीं होने से पीडि़त क्षुब्ध है। प्रशासन के बाद अब उसने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है। इस संबंध में पीडि़त ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत कर दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
उक्त आरोप जांजगीर जिला अंतर्गत ग्राम सरहर थाना बाराद्वार निवासी उजितराम राठौर ने न्यू कोरबा हॉस्पिटल पर यह आरोप लगाया है। लिखित शिकायत में उसने उल्लेख किया है कि विगत वर्ष 27 जनवरी 2018 को उसके पिता शत्रुहन राठौर को इलाज के लिए न्यू कोरबा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां उसके पिता को आईसीयू में वार्ड क्रमांक 1 में रखा गया। डॉक्टरों से पूछे जाने पर मरीज के सिर पर खून जमा होना बताया गया। हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा स्मार्ट कार्ड से 50 हजार रुपए का अनुबंध दस दिनों के लिए किया गया। प्रतिदिन उससे 15 से 20 हजार रुपए की दवाएं मंगाई जाती थी। इस बीच अस्पताल के चिकित्सक डॉ. दीविक एच. मित्तल से मरीज का हालचाल पूछने पर वे उस पर गुस्सा हो उठे। मरीज को क्या दवाएं दी जा रही थी यह भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा गुप्त रखा जाता था। इस बीच कई दिनों तक उसके पिता को अस्पताल में भर्ती रखा गया। इसी बीच डॉक्टर मित्तल ने उन्हें फोनकर बुलाया और कहा कि मरीज के किडनी में इंफेक्सन हो रहा है। उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कही। जिस पर उन्होंने हैरानी जताते हुए प्रबंधन से सवाल किए। जिसके बाद अस्पताल के मैनेजमेंट इंचार्ज राजेश चंदानी ने उन्हें बताया कि अस्पताल के साथ स्मार्ट कार्ड से 50 हजार रुपए का अनुबंध है। अगर इस बीच मरीज को किसी दूसरे अस्पताल लेकर जाते हैं तो स्मार्ट कार्ड का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए मरीज को दो तीन दिन न्यू कोरबा हॉस्पिटल में ही भर्ती रख मरीज के ठीक हो जाने की बात कही गई। जिससे मरीज का परिवार संतुष्ट हो गया। इसके कुछ दिनों बाद उसके पिता की स्थिति मेें सुधार नहीं हुआ। लिहाजा न्यू कोरबा हॉस्पिटल के द्वारा रायपुर रेफर किया गया। न्यू कोरबा हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा एंबुलेंस, ऑक्सीजन एवं स्टॉफ की व्यवस्था कर मरीज को रायपुर के लिए रवाना किया गया। बिलासपुर-रायपुर के बीच नानघाट के पास मरीज की स्थिति खराब होते देख एंबुलेंस स्टॉफ से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि एंबुलेंस का ऑक्सीजन खत्म हो चुका है। जिसके बाद हड़बड़ी में संजीवनी 108 को बुलाया गया।
संजीवनी 108 की मदद से मरीज को रायपुर मेकाहारा अस्पताल लाया गया। जहां डॉक्टरों ने परीक्षण उपरांत मरीज को मृत घोषित कर दिया। पीडि़त उजितराम का आरोप है कि इस दौरान आधे रास्ते में अस्पताल प्रबंधन का एंबुलेंस उन्हें छोड़कर वापस कोरबा लौट गया था। इलाज के दौरान दस दिनों में 1 लाख 95 हजार रुपए वसूले गए। जिसमें से 1 लाख 45 हजार रुपए नगद एवं 50 हजार रुपए स्मार्ट कार्ड से काटा गया है। इस मामले मेें कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत हुई थी। जिस पर जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन में डॉक्टरों की लापरवाही से मरीज की मृत्यु होना दर्शाया गया है। इसके बावजूद कलेक्टर द्वारा सिर्फ चेतावनी दिया गया है। इस तरह से अस्पताल प्रबंधन को अभयदान मिल गया है। अब अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई को लेकर पीडि़त उजित राम ने पुलिस अधीक्षक जितेंद्र सिंह मीणा से शिकायत की है।

पीडि़त ने उठाए हैं सवाल

पीडि़त उजितराम ने इस मामले में कई सवाल उठाए हैं। उसके अनुसार अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रारंभ से ही मरीज के संबंध में उन्हें सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। मरीज को दिए गए दवाईयों का नाम व विवरण सहित बिल उन्हें नहीं दिया गया। केवल दवाईयों की कीमत वाला बिल उन्हें दिया गया। चूंकि मरीज आईसीयू में भर्ती था। एंबुलेंस में एसी की व्यवस्था नहीं की गई थी। एंबुलेंस धूल भरे मार्ग से खुली खिड़की से ले जाया गया। एंबुलेंस में आक्सीजन सिलेंडर पूरा भरा क्यों नहीं रखा गया। जबकि आक्सीजन सिलेंडर का उससे पूरा चार्ज लिया गया। एंबुलेंस सहित स्टॉफ का चार्ज भी उससे लिया गया। फिर क्यों उसे आधे रास्ते में ही छोड़कर एंबुलेंस वापस लौट आया। इस तरह से विभिन्न बिंदुओं में सवाल उठाते हुए पीडि़त ने न्याय की गुहार लगाई है।

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