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ओरछा: जहाँ के राजा हैं श्रीराम

ओरछा में आज भी पुलिस द्वारा राजा राम को दिन में 5 बार गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है।

टीकमगढ़ : मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड में स्थित ओरछा एक छोटा सा शहर है, जो जिला टीकमगढ़ के अंतर्गत आता है। यह शहर अपने भव्य मन्दिरों और किलों के विश्व विख्यात है। यहां के भव्य शहरों और किलों को देखने हर रोज हजारों की तादाद में पर्यटक पहुंचते हैं।

भगवान राम को यहां भगवान मानने के साथ यहां का राजा भी माना जाता है, क्योंकि उस मूर्ति का चेहरा मंदिर की ओर न होकर महल की ओर है।आज भी भगवान राम को राजा के रूप में (राम राजा सरकार) ओरछा के इस मंदिर में पूजा जाता है।

ओरछा का इतिहास :

इसका इतिहास 15वीं शताब्दी से शुरू होता है, जब इसकी स्थापना रुद्र प्रताप सिंह जू बुन्देला ने की थी जो सिकन्दर लोदी से भी लड़ा था इस जगह की पहली और सबसे रोचक कहानी एक मंदिर की है। दरअसल, यह मंदिर भगवान राम की मूर्ति के लिए बनवाया गया था, लेकिन मूर्ति स्थापना के वक्त यह अपने स्थान से हिली नहीं। इस मूर्ति को मधुकर शाह बुन्देला के राज्यकाल (1554-92) के दौरान उनकी रानी गनेश कुवर अयोध्या से लाई थीं। रानी गनेश कुंवर वर्तमान ग्वालियर जिले के करहिया गांव की परमार राजपूत थीं। चतुर्भुज मंदिर बनने से पहले रानी पुख्य नक्षत्र में अयोध्या से पैदल चल कर बाल स्वरूप भगवान राम(राम लला)को ओरछा लाईं परंतु रात्रि हो जाने के कारण भगवान राम को कुछ समय के लिए महल के भोजन कक्ष में स्थापित किया गया। लेकिन मंदिर बनने के बाद कोई भी मूर्ति को उसके स्थान से हिला नहीं पाया। इसे ईश्वर का चमत्कार मानते हुए महल को ही मंदिर का रूप दे दिया गया और इसका नाम रखा गया राम राजा मंदिर। आज इस महल के चारों ओर शहर बसा है और राम नवमी पर यहां हजारों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं।

ओरछा में देखने लायक अनेक प्रसिद्ध सुंदर मंदिर व किले हैं।

श्री रामराजा मन्दिर :

भगवान श्रीराम का ओरछा में ४०० वर्ष पूर्व राज्याभिषेक हुआ था और उसके बाद से आज तक यहां भगवान श्रीराम को राजा के रुप में पूजा जाता है। यह पूरी दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है।

राज महल:

यह महल ओरछा के सबसे प्राचीन स्मारकों में एक है। इसका निर्माण मधुकर शाह ने 17 वीं शताब्दी में करवाया था।

लक्ष्मीनारायण मंदिर:

यह मंदिर 1622 ई. में बीरसिंह देव द्वारा बनवाया गया था। मंदिर ओरछा गांव के पश्चिम में एक पहाड़ी पर बना है। मंदिर में सत्रहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी के चित्र बने हुए हैं।

चतुर्भुज मंदिर :

राज महल के समीप स्थित चतुभरुज मंदिर ओरछा का मुख्य आकर्षण है। यह मंदिर चार भुजाधारी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण 1558 से 1573 के बीच राजा मधुकर ने करवाया था।

सुन्दर महल :

इस महल को राजा जुझार सिंह के पुत्र धुरभजन के बनवाया था।

फूलबाग :

बुन्देला राजाओं द्वारा बनवाया गया यह फूलों का बगीचा चारों ओर से दीवारों से घिरा है। पालकी महल के निकट स्थित यह बाग बुन्देल राजाओं का आरामगाह था।

माना जाता है कि यहां आज भी राजा राम का ही शासन है। इसी वजह से पुलिस द्वारा राजा राम को दिन में 5 बार गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। यहा परंपरा आज से करीब 400 साल पहले से चली आ रही है। यहां किसी और वीआईपी को भी कभी गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया गया, क्‍योंकि यहां के राजा केवल राम हैं। इसलिए केवल उन्‍हीं को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। यहां राजा राम को छोड़कर बाकी सब प्रजा हैं। लोग आते हैं और दरबार में अपनी हाजिरी लगाते हैं।

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