Fri. May 29th, 2020

ग्राम चिरौला में कोरोना के खौफ में संघर्ष और महंगाई की मार

दमोह : सम्पूर्ण भारत में 25 मार्च से 14 अप्रैल तक लाॅकडाउन की स्थिति निर्मित है। लोगों का घरों से निकलना पाबंद है। गांवों में भी सन्नाटा छाया हुआ है। कमोबेश यही स्थिति दमोह जिले के चिरौला ग्राम की भी है,जहां गलियां वीरान हैं। वहीं लोगो को आर्थिक मंदी की जद्दोजहद से दो-चार होना पड़ रहा है, उसी के साथ महंगाई की मार से हाल बेहाल है। दुकानदार भी किशुनगंज में महंगा सामान मिलने की दुहाई देकर अपना पलड़ा झाड़ रहे हैं। साथ ही कोरोना के खौफ को दरकिनार कर लोग घरों से बाहर निकल रहें हैं। साथ ही अभी फसलों की कटाई भी हो रही है। किसी को राशन की समस्या, किसी को पैसों कि किल्लत, किसी के सामने साग सब्जियों का संकट। ग्रामीणों का जीवन संघर्ष जैसा दिखाई दे रहा है। चिरौला में शराब दुकान बंद होने के बावजूद ,आसानी से शराब उपलब्ध हो रही है।

गांव में चूँकि रोजगार के साधन कम हैं इसलिए गांव के सैकड़ों ग्रामीण दिल्ली, मुम्बई, अमृतसर और राजस्थान के कई शहरों में मजदूरी करने जाते है,वे सभी लॉकडाउन में गांव वापिस आये हैं किंतु अभी तक इनकी कोई मेडिकल जांच नहीं हुई और ना ही इन्हें आइसोलेशन में रखा गया है। चिरौला के पटवारी आशीष का मानना है कि कोई भी व्यक्ति बाहर से आता है तो उसकी मेडिकल जांच जरूर होनी चाहिए। इसमें शासन और प्रशासन द्वारा घोर लापरवाही की जा रही है,जिससे ग्रामीणों पर कोरोना संक्रमण का खतरा बना हुआ है। जहां एक ओर सम्पूर्ण देश में कोरोना वायरस का कहर लोगो को सता रहा है, वहीं दूसरी ओर 21 दिनो के लाॅकडाउन से जिन्दगी संघर्ष बनकर रह गई है। हालांकि प्रशासन ने जरूरी सामग्री को लाॅकडाउन से अलग रखा है।

विदित हो कि देश में 21 दिनो के लाॅकडाउन ने सभी को घरो में कैद कर दिया है। वहीं गांवों और शहरों में रोज कुंआ खोदकर पानी पीने वालो के लिए अब तक के इतिहास में सबसे बड़ा संघर्ष सामने आ खाड़ा हुआ है।

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