Sun. Feb 23rd, 2020

भारत में हिमाचल प्रदेश में पहली बार होगी “हींग की खेती”

पालमपुर : भारत में पहली बार हींग की खेती शुरू होने वाली है। भारत में अभी तक हींग का उत्पादन नहीं होता था। सीएसआईआर के हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर में हींग के उत्पादन का उत्पादन किया जाएगा।

हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी) पालमपुर ने गुणवत्तायुक्त हींग की पौध तैयार की है। इससे पूर्व में भी हिमाचल के अन्य क्षेत्रों, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और नेपाल से लगे उत्तरप्रदेश में हींग की खेती करने का प्रयास किया गया लेकिन अपेक्षाकृत सफलता नहीं मिल पाई।

पांच वर्ष में तैयार होता है पौधा :

एक अनुमान के मुताबिक हींग के एक पेड़ से एक किलो तक दूध निकलता है। इसका एक पौधा दूध देने के लिए पांच वर्ष में तैयार होता है। जो कि 11 हजार रुपए से 40 हजार रुपए तक बिकता है। शुद्ध हींग की कीमत 35 हजार रुपए किलो होती है। इसका मसालों से लेकर दवाइयों में इस्तेमाल होता है। भारत के खाने में हींग का विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि हींग खाने से पेट की बीमारियां दूर रहती हैं।

विदित हो कि भारत हींग का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। लेकिन भारत में हींग उगाई नहीं जाती है। संस्थान का प्रयास है कि देश के लिए हींग उगाई जाए और इससे किसानों की आर्थिकी भी मजबूत होगी व हींग की फसल हिमालयी क्षेत्रों के किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी।

भारत में प्रतिवर्ष 1150 टन हींग की खपत होती है और देश 70 मिलियन डॉलर का हींग प्रतिवर्ष आयात करता है। अफगानिस्तान भारत को हींग की आपूर्ति करने वाला सबसे प्रमुख देश है।अफगानिस्तान से 90 प्रतिशत हींग भारत आयात करता है ।

सीएसआईआर के हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी) पालमपुर के के अनुसार देश में पहली बार नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक के माध्यम से संस्थान को हींग के बीज उपलब्ध हुए हैं । बता दें कि अगले वर्ष यानी 2021 तक यह किसानों को उपलब्ध हो जाएगा।

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