Sat. Jun 6th, 2020

राजनांदगाँव भक्ति के लिए उम्र का बंधन नही—पंडित मिश्रा

RAIPURAAJTAK

महेन्द्र शर्मा, राजनांदगाँव : शहर से लगे समीपवर्ती ग्राम सुखरी में चल रहे श्रीमद भागवत कथा में कथा व्यास में विराजित पंडित शैलेन्द्र मिश्रा जी लखनपुर वाले ने कहा अपनी मृत्यु को शुद्ध करने के लिए भागवत कथा का आश्रय लेना पड़ता है।मानव शरीर को केवल भोग और कामना में व्यतीत नही करना चाहिए, यह काम तो पशु भी कर लेते है, ईश्वर प्राप्ति ही मनुष्य का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए, जिस प्रकार एक छोटे से बालक ध्रुव ने अपनी दृढ इक्छा से भगवान नारायण को प्राप्त किया, भगवत प्राप्ति के लिए उम्र का बंधन नही होता।
पँ. मिश्रा ने जड़ भरत की कथा सुनाते हुए कहा कि अंत समय मे जो जैसा मन लगाता है वही गति मनुष्यो को प्राप्त होती है, जैसे भरत ने हिरण की योनि प्राप्त की, फिर बाद में केवल उनको पछताना पड़ा,जो व्यक्ति निरंतर भगवान की भक्ति में लीन रहता है, उनके सभी कामनाये भगवान पूर्ति करते है,भक्ति ज्ञान और वैराग्य का समन्वय ही भागवत है, भगवान श्री कृष्ण ने उद्धव से कहा था कि इस कलयुग में श्री राधा जी के साथ इस भागवत पुराण में मेरा स्थान होगा,जो व्यक्ति इसे श्रवण करेगा, उनके सारे बंधन मुक्त कर उनको गोलोक धाम की प्राप्ति होती है।ईश्वर पर आस्था होना ही परम सुख प्रदान करता है, जब तक प्राणी मोह लोभ को त्याग नही कर लेता तब तक उसको माया के बंधन से मुक्ति नही मिलती,ग्राम सुखरी में समस्त ग्राम वासी द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा 30 जनवरी तक चलेगी,कथा का रसपान करने क्षेत्र के श्रद्धालुगण अधिक संख्या में आ कर कथा का लाभ ले रहे है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed