Sun. Feb 16th, 2020

जिला सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ के उपपंजीयक ने दुर्ग जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के बहिर्गामी संचालक मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन और तत्कालीन CEO डीआर साहू को बैंक को 27 लाख 26 हजार 699 रुपए आर्थिक क्षति पहुंचाने का दोषी ठहराया है। जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष व CEO से 27.26 लाख ब्याज समेत वूसली का आदेश, कार्यकाल खत्म होने के बाद की थी राशि खर्च..

दुर्ग.( प्रवीण मिर्जे ) सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ के उपपंजीयक एलएन टंडन ने दुर्ग जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के बहिर्गामी संचालक मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन और तत्कालीन सीईओ डीआर साहू को बैंक को 27 लाख 26 हजार 699 रुपए आर्थिक क्षति पहुंचाने का दोषी ठहराया है। उन्होंने यह राशि दोनों से ब्याज समेत वसूल करने का आदेश दिया है। उपपंजीयक ने बर्हिगामी संचालक मंडल के उपाध्यक्ष व अन्य सदस्यों को वसूली से मुक्त रखा है। उन्होंने आदेश में कहा है कि संचालक मंडल के अन्य सदस्यों को विधि का पूर्ण रूप से ज्ञान नहीं होता। बहिर्गामी संचलाक मंडल की बैठक में सदस्यों की भूमिका प्रमाणित नहीं होता। बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष व तत्कालीन सीईओ के बुलावे पर वे बैठक में उपस्थित हुए और कार्यवाही पंजी पर हस्ताक्षर किए हैं। इसलिए बहिर्गामी संचालक मंडल की अवैधनिक बैठक आयोजित करने के लिए बहिर्गामी संचालक मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष और तत्कालीन सीईओ ही दोषी हैं।
कार्यकाल खत्म होने के बाद बुलाई बैठक।
उपपंजीयक ने आदेश में कहा है कि बैंक के संचालक मंडल का पांच वर्ष का कार्यकाल खत्म होने के बाद यह बैठक बुलाई गई थी। संचालक मंडल का कार्यकाल 25 अप्रैल 2013 को समाप्त हो गया था। उसके बाद 26 अप्रैल 2013 को बहिर्गामी संचालक मंडल की बैठक बुलाई गई थी। जिसमें सोसाइटी अधिनियमों के प्रवाधानों का हवाला देकर आगामी चुनाव तक संचालक मंडल के क्रियाशील रहने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस बैठक को संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं रायपुर ने शून्य घषित कर दिया था। शून्य घोषित करने के आदेश को प्र्रीतपाल बेलचंदन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिसमें हाईकोर्ट ने यथास्थिति का आदेश दिया था।
पंजीयक ने भेजा कारण बताओ नोटिस
उपपंजीयक ने आदेश में कहा है कि हाईकोर्ट के यथास्थिति के आदेश की गलत व्याख्या की गई और बहिर्गामी संचालक मंडल ने 13 अगस्त 2013 को बैठक बुलाकर बैंक की राशि 27 लाख 26 हजार 699 रुपए की अनियमित व्यय को स्वीकृत किया गया। इस पर पंजीयक सहकारी संस्थाएं ने बर्हिगामी संचलक मंडल के अध्यक्ष व सीईओ को कारण नोटिस जारी कर पूछा था कि संचालक मंडल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी उन्होंने बैंक को वित्तीय क्षति पहुंचाई है।
इस नोटिस का बहिर्गामी संचालक मंडल ने जवाब दिया कि बैंक के संचालक मंडल के चुनाव के लिए कार्यकाल समाप्त होने के 6 माह पहले ही सूचना दी गई थी। इसके बाद भी चुनाव नहीं कराया गया। संचालक मंडल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी तत्काल प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त न कर महीनों बैंक के क्रियाकलापों,ऋण वितरण, महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने में देरी की गई। कृषकों के आक्रोश पर लिया निर्णय कृषकों को होने वाली परेशानी और आक्रोश को देखते हुए बोर्ड द्वारा प्रस्ताव कर यह निर्णय लिया गया कि सहकारी सोसाइटी अधिनियम की धारा 53 में वर्णित प्रावधानित के तहत 14 (एक) (दो) (तीन) के तहत जिला सहकारी केंद्रयी बैक दुर्ग नहीं आता, ऐसी स्थिति में आगामी निर्वाचन तक वर्तमान संचालक मंडल तथावत क्रियाशील रहेगी। संयुक्त संचालक ने जब बैठक को शून्य घोषित किया उसके बाद बैठक में लिए गए निर्णयों का क्रियान्वयन नहीं किया गया। राशि बैंक के लाभ के फंड से जनहित में खर्च की गई है। किसी निजी संस्था को नहीं बल्कि शासकीय जिला अस्पतालों के लिए खर्च की गई है।
बहिर्गामी संचालक मंडल के इस जवाब को उपपंजीयक ने खारिज कर दिया। उन्होंने आदेश में कहा कि छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम 1960 की धारा 49 (8) में स्पष्ट प्रावधान है कि बोर्ड का कार्यकाल के अवसान के पूर्व निर्वाचन नहीं कराया जाता है तो बोर्ड के सभी सदस्यों द्वारा अपने पद रिक्त कर दिए समझे जाएंगे। अधिनियम के उक्त प्रावधानों के तहत बैंक के बहिर्गामी संचालक मंडल की शक्तियां पंजीयक सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ में निहित हो चुकी थी।
इसकी जानकारी बहिर्गामी संचालक मंडल के अध्यक्ष और सीईओ की थी। इसके बाद भी उन्होंने बहिर्गामी संचालक मंडल की बैठक बुलाई। इसलिए राशि मय ब्याज उनसे वूसल किया जाए। पूर्व अध्यक्ष जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग, प्रीतपाल बेलचंदन ने बताया कि कार्यकाल खत्म होने के 6 माह पहले चुनाव करवाने के लिए लिखा था। बैठक बुलाई उसकी जानकारी पंजीयक को थी। उस समय कुछ नहीं कहा गया। जो राशि खर्च की गई है वह बैंक के लाभ से की गई है। राशि किसी निजी संस्था के लिए नहीं बल्कि सामाजिक सरोकार के तहत दुर्ग, बालोद और बेमेतरा के शा. जिला अस्पतालों मे स्वास्थ्यगत उपकरण के लिए किया गया है। यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है।

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